Trump’s Board of Peace: भारत ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने से क्यों लिया दूरी का फैसला?

Trump’s Board of Peace: स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) की बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नए शांति निकाय ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का औपचारिक शुभारंभ किया। यह बोर्ड मुख्य रूप से गाजा में युद्धविराम की निगरानी और युद्ध प्रभावित क्षेत्र के पुनर्निर्माण के लिए बनाया गया है। हालांकि, इस आयोजन में भारत की मौजूदगी नहीं रही। अमेरिका को छोड़कर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के अन्य स्थायी सदस्य और G7 देशों के कोई प्रतिनिधि इस बोर्ड का हिस्सा नहीं बने। भारत को इस पहल में शामिल होने का निमंत्रण मिला था, लेकिन भारतीय प्रतिनिधि समारोह में नहीं पहुंचे और अभी भारत ने बोर्ड में शामिल होने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।
भारत की चिंताएं और बोर्ड की भूमिका
सूत्र बताते हैं कि भारत इस मामले में अपने प्रमुख साझेदार देशों जैसे फ्रांस और रूस के रुख पर नजर बनाए हुए है। भारत को इस नए बोर्ड के चलते संयुक्त राष्ट्र की भूमिका कमजोर होने का डर है। साथ ही, ट्रंप के बोर्ड के आजीवन अध्यक्ष बने रहने से इसकी निष्पक्षता पर सवाल भी उठ रहे हैं। आधिकारिक दस्तावेजों में गाजा का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जबकि इसे गाजा संकट के समाधान के लिए बनाया गया बताया जाता है। इसके बजाए बोर्ड को दुनिया के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में हस्तक्षेप करने का व्यापक अधिकार दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और ढांचों को चुनौती मिल सकती है, जो वैश्विक शांति व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

ट्रंप के दावे और भारत का खंडन
शुभारंभ समारोह में ट्रंप ने दावा किया कि पिछले नौ महीनों में उन्होंने आठ युद्ध खत्म कराए हैं। उन्होंने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव को रुकवाने का भी श्रेय अपने नाम किया और कहा कि इस बीच लाखों लोगों की जान बचाई गई। हालांकि, भारत ने इस दावे को खारिज कर दिया है। भारत का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों की समझ से कम हुआ था और इसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं थी। वहीं, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के समारोह में पाकिस्तान सहित 19 देशों ने हिस्सा लिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की मौजूदगी भी चर्चा में रही।
आगे की रणनीति और भारत की प्रतिक्रिया
‘बोर्ड ऑफ पीस’ का नेतृत्व डोनाल्ड ट्रंप के हाथ में है जो इसके आजीवन अध्यक्ष होंगे। उन्होंने सात सदस्यों को इस बोर्ड में शामिल किया है, जिनमें मार्को रुबियो, टोनी ब्लेयर, अजय बंगा जैसे नाम शामिल हैं। ट्रंप के दामाद और बोर्ड के कार्यकारी सदस्य जेरेड कुशनर ने गाजा के पुनर्निर्माण के लिए एक योजना भी पेश की है, जिसमें फिलिस्तीनी राज्य के निर्माण का उल्लेख नहीं है। इस योजना को लागू करना हमास के निशस्त्रीकरण और इजरायली सेना की वापसी जैसे जटिल मुद्दों के कारण आसान नहीं माना जा रहा। भारत फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपना रहा है। इस मुद्दे पर 30-31 जनवरी को नई दिल्ली में होने वाली अरब लीग की विदेश मंत्रियों की बैठक में चर्चा हो सकती है। इसके अलावा फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित इजरायल यात्रा को भी इस क्षेत्रीय कूटनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत अपने विदेशी नीतिगत फैसले इन घटनाक्रमों के आधार पर ही लेगा।